Join Whatsapp Group
यहाँ क्लिक करेंहरियाणा में कंस्ट्रक्शन साइट पर मिट्टी का टीला ढह जाने से सात मजदूरों की मौत हो गई और चार घायल हो गए। मृतकों में छह झारखंड के रहने वाले थे। घायल मजदूरों में से तीन नेपाल के हैं। पुलिस ने बताया कि परियोजना प्रभारी और निर्माण स्थल प्रभारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच के लिए जिला प्रशासन ने एक जांच समिति का गठन किया। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय उपलब्ध नहीं थे। अधिकारियों ने बताया कि घटना सोमवार शाम गुरुग्राम के सिधरावली इलाके में स्थित सिग्नेचर ग्लोबल सोसाइटी में हुई।
झारखंड के 6 मजदूरों समेत 7 लोगों की गुरुग्राम में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हो गई। जमीन के नीचे सभी काम कर रहे थे, तभी ऊपर से मिट्टी का टीला धंस गया, जिसमें सभी दब गए।
जानकारी के अनुसार मजदूरों ने कहा था कि वहां टाटा स्टील (ठेका मजदूरी) से ज्यादा पैसे मिलेंगे। बच्चों की पढ़ाई और घर की मरम्मत के लिए कुछ जोड़ लूंगा। फरवरी की उस सुबह जब वह रेलगाड़ी में बैठ रहे थे, तो मुस्कुराकर कहा था- अपना ख्याल रखना, अगली बार आऊंगा तो तुम्हारे लिए गहने और बच्चों के लिए नए कपड़े लाऊंगा। झारखंड के जादूगोड़ा स्थित बनगोड़ा गांव की एक बदहवास पत्नी के ये शब्द उस त्रासदी की कहानी कह रहे हैं, जिसने सात परिवारों के चिराग बुझा दिए।
सोमवार की रात गुरुग्राम के सिधरावली में सिग्नेचर ग्लोबल सोसायटी की निर्माणाधीन साइट पर मिट्टी धंसी, तो सिर्फ मजदूर नहीं दबे, बल्कि उन सैकड़ों सपनों की भी मौत हो गई जो बेहतर जिंदगी की तलाश में कोसों दूर से हरियाणा आए थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों में शामिल जादूगोड़ा के चार युवक- मंगल महतो, भगीरथ गोप, धनंजय महतो और संजीव और बनिहारा पूर्वी सिंहभूम के शिवशंकर व होन्डई पूर्वी सिंहभूम परमेश्वर महतो के अलावा बुरका जडथल नगर, भरतपुर राजस्थान के सतीश एक महीने पहले ही एक दलाल के माध्यम से काम की तलाश में गुरुग्राम पहुंचे थे।
इससे पहले ये युवक जमशेदपुर की टाटा स्टील में ठेका मजदूर के रूप में काम करते थे। लेकिन वहां मिलने वाली कम मजदूरी और अनिश्चित भविष्य ने उन्हें पलायन के लिए मजबूर किया।
उन्हें लगा था कि गुरुग्राम की ऊंची इमारतों के निर्माण में उनके पसीने की कीमत ज्यादा मिलेगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।वे एक हादसे में काल के गाल में समा गए। हादसे के वक्त बेसमेंट की खुदाई चल रही थी। करीब 25 मजदूर वहां मौजूद थे, जब अचानक मिट्टी की एक विशाल दीवार भरभराकर गिर पड़ी।
संजीव उर्फ दुलाल गोप और मंगल महतो जैसे युवक, जो अपनी पत्नियों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देकर निकले थे, मिट्टी के नीचे दब गए । भगीरथ गोप के पीछे उनकी चार बेटियां और एक छोटा बेटा गौरव है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। वहीं मंगल महतो का छह साल का बेटा तनिश अब भी अपनी मां मधुलिता महतो से पूछ रहा है ‘पापा कब आएंगे?’ मधुलिता, जो खुद सदमे में हैं, भारी मन से अपने पति के शव को लाने के लिए निजी वाहन से हरियाणा रवाना हो चुकी हैं।
- मंगल महतो बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
- भगीरथ गोप बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
- धनंजय महतो बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
- संजीव उर्फ दुलाल गोप बनगोड़ा(जादूगोड़ा) झारखंड
- शिवशंकर बनिहारा पूर्वी सिंहभूम झारखंड
- परमेश्वर महतो होन्डई पूर्वी सिंहभूम झारखंड
- सतीश बुरका जडथल नगर, भरतपुर राजस्थान
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के रहने वाले इन मजदूरों की मौत ने एक बार फिर उस कड़वे सच को सामने ला दिया है कि राज्य में रोजगार की कमी कैसे युवाओं को मौत के कुएं में धकेल रही है। बनगोड़ा गांव में आज चूल्हा नहीं जला है। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है। बेसमेंट की इतनी गहरी खुदाई के दौरान क्या पर्याप्त सुरक्षा घेरा (Shoring) बनाया गया था?
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

